Friday, February 15, 2019

मन्ज़िल

दुनिया घूमी घूमा देश जहान तूने घूमा देश ज़हान
पर दो कदम पे तेरी मन्ज़िल क़ब्रिस्तान या शमशान

गाड़ी ले ली , ले ली कोठी , कोठी आलीशान
 पर मिला क्या तुझको, बना न तू इंसान
आलिम तू है , आमिल तू है ,
फ़ाज़िल तू है , कामिल तू है
फिर क्यों ये अज्ञान
बन्दे दो कदम पे तेरी मन्ज़िल क़ब्रिस्तान या शमशान

आया जग में वेश में तू इंसानों के
पर सब कुछ भूला काम किए शैतानों से
अब परलोक सुधार कर ले धर्म व दान
क्योंकि दो कदम पे तेरी मन्ज़िल क़ब्रिस्तान या शमशान

खाना भूला दाना भूला पूजा भूला दुआ तू भूला
कैसा तेरा काम व्यापार
माया मोह में उसको भूला जिससे तेरी हर दरकार
अब खाना भूल दाना भूल कर ले कर ले ध्यान

क्योंकि दो  कदम पे तेरी मन्ज़िल क़ब्रिस्तान या शमशान

मैं हूँ मैं हूँ मैं हूँ मैं हूँ रूतबा तेरा तेरा मयार
मैं मैं मैं मैं करते करते जीवन दिया गुज़ार
मैं रावण का न रहा , ना रहेगा तेरा

मत कर तू गुमान

क्योंकि दो कदम पे तेरी मन्ज़िल क़ब्रिस्तान या शमशान

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