Friday, February 15, 2019

मन्ज़िल

दुनिया घूमी घूमा देश जहान तूने घूमा देश ज़हान
पर दो कदम पे तेरी मन्ज़िल क़ब्रिस्तान या शमशान

गाड़ी ले ली , ले ली कोठी , कोठी आलीशान
 पर मिला क्या तुझको, बना न तू इंसान
आलिम तू है , आमिल तू है ,
फ़ाज़िल तू है , कामिल तू है
फिर क्यों ये अज्ञान
बन्दे दो कदम पे तेरी मन्ज़िल क़ब्रिस्तान या शमशान

आया जग में वेश में तू इंसानों के
पर सब कुछ भूला काम किए शैतानों से
अब परलोक सुधार कर ले धर्म व दान
क्योंकि दो कदम पे तेरी मन्ज़िल क़ब्रिस्तान या शमशान

खाना भूला दाना भूला पूजा भूला दुआ तू भूला
कैसा तेरा काम व्यापार
माया मोह में उसको भूला जिससे तेरी हर दरकार
अब खाना भूल दाना भूल कर ले कर ले ध्यान

क्योंकि दो  कदम पे तेरी मन्ज़िल क़ब्रिस्तान या शमशान

मैं हूँ मैं हूँ मैं हूँ मैं हूँ रूतबा तेरा तेरा मयार
मैं मैं मैं मैं करते करते जीवन दिया गुज़ार
मैं रावण का न रहा , ना रहेगा तेरा

मत कर तू गुमान

क्योंकि दो कदम पे तेरी मन्ज़िल क़ब्रिस्तान या शमशान

वीरों को सलाम

जय हो भारत भारत माता की

हर हिंदी भाग्य विधाता की
जय हो भारत माता की

जय हो भारत माता की
हिंदी भाग्य विधाता की
जय हो भारत माता की

धरा पे जिसकी बह रही गंगा
आसमां में लहराए तिरंगा
ऐसे हिंदी दाता की

जय हो भातर माता की
हिंदी भाग्य विधाता की
जय हो भारत माता की

ताज है जिसका खुद हिमाला
चरणों मे सागर डेरा डाला
ऐसे जग विख्याता की

जय हो भारत माता की
हिंदी भाग्य विधाता की
जय हो भारत माता की

कश्मीर से लेकर कन्या तक अजब छटा निराली है
आबाद यहाँ पर जर्रा जर्रा आबाद यहाँ हर डाली है
ऐसे समृद्धि दाता की

जय हो भारत माता की
हिंदी भाग्य विधाता की
जय हो भारत माता की

करे हैं पैदा वीर महान
रखी जिन्होंने माँ की शान
ऐसी अमर गाथा की


जय हो भारत माता की
हिंदी भाग्य विधाता की
जय हो भारत माता की


Sunday, January 18, 2015

waqt

                                                                     

                                                 वक़्त
वक़्त बनकर के इक हाथ ,
हर मोड़ लगा रखी है घात /
.
कब वक़्त का पंजा , रूह उडा ले जाये ,
बन रेत साँस , बंद मुट्ठी से छुट जाये ,
सोचों से भी मीलों आगे , वक़्त दे दे मात ,
.
वक़्त बनकर के इक हाथ ,
हर मोड़ लगा रखी है घात /
.
वक़्त चाहे, जिसे चाहे कंकाल करे ,
वक़्त चाहे , सीधी राह जंजाल करे ,
खट्टी मीठी कभी नरम, कभी है सख्त वक़्त की बात ,
.
वक़्त बनकर के इक हाथ ,
हर मोड़ लगा रखी है घात/
.
हर हर चोट का ये मरहम है ,
चोट देने का , इसमें ही दम है ,
दम बेदम का, हर रंज-ओ -ग़म का ,वक़्त करे हिसाब ,
.
वक़्त बनकर के इक हाथ ,
हर मोड़ लगा रखी है घात ,
.
जहाज वक़्त ने मिटा दिए बड़े - बड़े ,
महल वक़्त ने गिरा दिए खड़े - खड़े ,
वक़्त उठाये ,वक़्त गिराए,वक़्त मिटाए हर औकात ,
.
वक़्त बनकर के इक हाथ ,
हर मोड़ लगा रखी है घात ,
.
वक़्त खुद सवाल है ,वक़्त खुद जवाब है ,
वक़्त खुद काल है ,वक़्त खुद ढाल है ,
वक़्त खिलाड़ी ऐसा , हर शह की जिसपे मात ,
.
वक़्त बनकर के इक हाथ ,
हर मोड़ लगा रखी है घात ,
.
ना वक़्त ने रावण छोड़ा ,न छोड़े कौरव पांडव ,
फौलाद फ़ना हो जाये , जब वक़्त करे तांडव ,
हर शै बे-मानी है , है वक़्त की ऐसी ज़ात ,
.
वक़्त बनकर के इक हाथ ,
हर मोड़ लगा रखी है घात ,

                                                                                             राज
 

 

Wednesday, January 7, 2015

अमर शहीदों की जय

गूंज रही हैं चारों दिशाएं महावीरों के नारों से ,
काट चढ़ा आये सिर अपना जो खुद अपनी तलवारों से ,
ऐसे वीरों को प्रणाम , ऐसे पूतों को सलाम l 
.
राज पराया, घायल भारत माता, थी विदेशी वारों से ,
छिन रही थी आज़ादी भारत माँ के प्यारों से ,
छोड़ के आगे आये , प्यार जो अपने प्यारो से ,
काट चढ़ा आये सिर अपना जो खुद अपनी तलवारों से ,
ऐसे वीरों को प्रणाम , ऐसे पूतों को सलाम l 
.
मिटा के छोड़ा राज विदेशी , भारत माँ की भूमि से ,
मिटे हजारों चाहे , भगा के छोड़ा भारत माँ की भूमि से ,
आज गुंजा दो आसमां तुम सब उनके नारों से ,
काट चढ़ा आये सिर अपना जो खुद अपनी तलवारों से ,
ऐसे वीरों को प्रणाम , ऐसे पूतों को सलाम l 
.
कोटि - कोटि , पल - पल छिन - छिन करें याद हम उनको ,
देश की खातिर रही न याद ख़ुशी खुद जिनको ,
दे गए समां सुहाना , कर के मुक्त अत्याचारों  से ,
काट चढ़ा आये सिर अपना जो खुद अपनी तलवारों से ,
ऐसे वीरों को प्रणाम , ऐसे पूतों को सलाम l 

मेरा मुल्क हिन्दोस्तान

मेरी पहली है पहचान 
मेरा मुल्क हिन्दुस्तान 
मेरा मुल्क हिन्दुस्तान 
मेरी पहली है पहचान 
हिन्दुस्तान - - - -  - - --  - -
मेरी आन मेरी शान 
मेरा दीन और ईमान 
मेरा मुल्क हिन्दुस्तान 
हिन्दुस्तान - - - -  - - --  - -
दे दूँ जान इसकी खातिर 
सब कुछ इसकी राह में हाज़िर 
हर हिंदी को ये पैगाम 
सबसे पहले हिन्दुस्तान 
हिन्दुस्तान - - - -  - - --  - -
मेरी माता है ये 
मेरा दाता है ये 
भाग्य विधाता है ये 
ये मेरा है भगवान 
मेरा मुल्क हिन्दुस्तान 
हिन्दुस्तान - - - -  - - --  - -
दूर तलक फैली हरियाली 
आबाद यहाँ है डाली डाली 
बह रही है यमुना गंगा 
आसमां में ऊँचा तिरंगा 
बसते इसमें मेरे प्राण 
मेरा मुल्क हिन्दुस्तान 
हिन्दुस्तान - - - -  - - --  - -
मेरी पहली है पहचान 
मेरा मुल्क हिन्दुस्तान 
मेरा मुल्क हिन्दुस्तान 
मेरी पहली है पहचान 
हिन्दुस्तान - - - -  - - --  - -

Saturday, December 27, 2014

गुस्सा

                               गुस्सा  
जो गुस्से को मारा होता ,
ना  ये हाल तुम्हारा होता ,
लुट गए घर परिवार ,
हुए बर्बाद बेटी - बेटे ,
खो गई सब चमक गुमानी ,
भूल गया अब सारी ऐठें ,
ख़ुशी चादर बिछाती ,
लक्ष्मी चंवर झुलाती ,
जो अकड़ को मारा होता ,
ना ये हाल .....................
.
क्षण भर में ख़त्म ये गुस्सा ,
पर पोतों को जंजाल बना ये किस्सा ,
अदालत खर्चा हाई - फाई ,
लुट गई सारी हाय कमाई ,
जो थोडा सा विवेक धारा होता ,
जो ज्वाला में जल मारा होता ,
ना ये हाल .....................
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रो रही आज सारी पीढ़ी ,
चढ़ते रोज़ अदालत सीढ़ी ,
हर किसी के नखरे सहते ,
चाहकर भी तुम कुछ ना कहते ,
गर यही गुस्सा उस वक़्त मारा होता ,
सुखी संसार ,घर परिवार तुम्हारा होता./ 
.
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                                                                  राज़