Wednesday, January 7, 2015

अमर शहीदों की जय

गूंज रही हैं चारों दिशाएं महावीरों के नारों से ,
काट चढ़ा आये सिर अपना जो खुद अपनी तलवारों से ,
ऐसे वीरों को प्रणाम , ऐसे पूतों को सलाम l 
.
राज पराया, घायल भारत माता, थी विदेशी वारों से ,
छिन रही थी आज़ादी भारत माँ के प्यारों से ,
छोड़ के आगे आये , प्यार जो अपने प्यारो से ,
काट चढ़ा आये सिर अपना जो खुद अपनी तलवारों से ,
ऐसे वीरों को प्रणाम , ऐसे पूतों को सलाम l 
.
मिटा के छोड़ा राज विदेशी , भारत माँ की भूमि से ,
मिटे हजारों चाहे , भगा के छोड़ा भारत माँ की भूमि से ,
आज गुंजा दो आसमां तुम सब उनके नारों से ,
काट चढ़ा आये सिर अपना जो खुद अपनी तलवारों से ,
ऐसे वीरों को प्रणाम , ऐसे पूतों को सलाम l 
.
कोटि - कोटि , पल - पल छिन - छिन करें याद हम उनको ,
देश की खातिर रही न याद ख़ुशी खुद जिनको ,
दे गए समां सुहाना , कर के मुक्त अत्याचारों  से ,
काट चढ़ा आये सिर अपना जो खुद अपनी तलवारों से ,
ऐसे वीरों को प्रणाम , ऐसे पूतों को सलाम l 

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