वक़्त
वक़्त बनकर के इक हाथ ,
हर मोड़ लगा रखी है घात /
.
कब वक़्त का पंजा , रूह उडा ले जाये ,
बन रेत साँस , बंद मुट्ठी से छुट जाये ,
सोचों से भी मीलों आगे , वक़्त दे दे मात ,
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वक़्त बनकर के इक हाथ ,
हर मोड़ लगा रखी है घात /
.
वक़्त चाहे, जिसे चाहे कंकाल करे ,
वक़्त चाहे , सीधी राह जंजाल करे ,
खट्टी मीठी कभी नरम, कभी है सख्त वक़्त की बात ,
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वक़्त बनकर के इक हाथ ,
हर मोड़ लगा रखी है घात/
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हर हर चोट का ये मरहम है ,
चोट देने का , इसमें ही दम है ,
दम बेदम का, हर रंज-ओ -ग़म का ,वक़्त करे हिसाब ,
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वक़्त बनकर के इक हाथ ,
हर मोड़ लगा रखी है घात ,
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जहाज वक़्त ने मिटा दिए बड़े - बड़े ,
महल वक़्त ने गिरा दिए खड़े - खड़े ,
वक़्त उठाये ,वक़्त गिराए,वक़्त मिटाए हर औकात ,
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वक़्त बनकर के इक हाथ ,
हर मोड़ लगा रखी है घात ,
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वक़्त खुद सवाल है ,वक़्त खुद जवाब है ,
वक़्त खुद काल है ,वक़्त खुद ढाल है ,
वक़्त खिलाड़ी ऐसा , हर शह की जिसपे मात ,
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वक़्त बनकर के इक हाथ ,
हर मोड़ लगा रखी है घात ,
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ना वक़्त ने रावण छोड़ा ,न छोड़े कौरव पांडव ,
फौलाद फ़ना हो जाये , जब वक़्त करे तांडव ,
हर शै बे-मानी है , है वक़्त की ऐसी ज़ात ,
.
वक़्त बनकर के इक हाथ ,
हर मोड़ लगा रखी है घात ,
राज
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