Thursday, December 25, 2014

दीवार

खड़ी की थीं कल जो दीवारें घर के मुखिया ने घर की आड़ को ,
उठी बढीं हैं आज वहीं दीवारें मन में, बाँट रहीं घर द्वार को ,
दुखिया रोये मुखिया रोये देख के अपने घर संसार को /
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कर के मेहनत रात दिन एक छोटा सा बाग़ लगाया था ,
बना के खून पसीना अपना हर गुल को महकाया था ,
खाद बना कर अपनी साँस हर पौधे में  जान फूंकी ,
होता था ग़मगीन माली , जब भी कोई जो कली झुकी ,
खुश होता था देख के मुखिया  खुश अपने परिवार को ,

दुखिया रोये .....................................................
खड़ी की थीं ......................................................
उठी बढीं हैं .......................................................
दुखिया रोये ....................................................../
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चार से आठ हुईं दीवारें घर का मुखिया रोता है ,
रातों जागे नींद न आवे जग सारा जब सोता है ,
रोते रोते सोचे वो , सोचे सोचे रोता वो , किसकी लगी है नज़र हाय ,
रात की नींद और दिन का चैन लूट के ले गया कौन हाय ,
फफक पड़ता है उसका दिल और छलक पड़तीं हैं अँखियाँ , 
सोच  पुराने दिन और घर द्वार को ,
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दुखिया रोये .....................................................
खड़ी की थीं ......................................................
उठी बढीं हैं .......................................................
दुखिया रोये ....................................................../
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सब गुलों की खातिर की इक जैसी, सबको दिया था सुख सम्मान ,
आज शरीर से अपने हारा माली तो हर गुल बन रहा अनजान ,
हर गुल ने अपने चारों ओर खड़ी कर ली है इक दीवार ,
देख के अनदेखा और सुन के अनसुना करें,
बदला         सबका         ही           व्यवहार ,
फिर भी रब से मांगे दुआ इन्हीं गुलों के सुखी घर-संसार को ,
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दुखिया रोये .....................................................
खड़ी की थीं ......................................................
उठी बढीं हैं .......................................................
दुखिया रोये ....................................................../
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घर की दीवारें  गिरा दे जो, न वो मजदूर चाहिए  /
दिखे न जिसको कोई , न वो गुरूर चाहिए  /
मुझे तर्क-ए -दिली दीवारों के अहसास का सुरूर चाहिए /
खुश होगा मुखिया जब खुश रहेंगे बच्चे अपनी बार को /
रश्क करेगी दुनिया राज़ देख के ऐसे घर परिवार को  /


                                           

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