नशा है करता नाश उसी का
जिसने है समझा जरिया ख़ुशी का /
.
कौड़ी कौड़ी माया जोड़ी, निशि-दिन जो भी कमाया
थोड़ी थोड़ी जो भी जोड़ी ,लुट गई जिसने गले लगाया
घर बना है मैदान जंग-ए-कशीं का
जिसने है समझा .............................................
.
घर भूल संसार को भूला
बच्चे भूला परिवार को भूला
शौक की खातिर अपने उसने
मुंह से लगाया इसको जिसने
कर दिया खून घर की हँसी का
जिसने है समझा .............................................
.
पल पल उसकी गलती काया
जेब से उसके जाती माया
खोके विवेक और होक अँधा
करता तैयार खुद ही फंदा
खुशियाँ रोतीं रोना अपनी बे-बसी का
जिसने है समझा .............................................
.
बीवी रोती , सास रोती ,
बाप रोता ,मात रोती ,
जायदाद बिकी और बिक गई कोठी ,
मोहताज़ हुआ अब , न मिलती रोटी
खून के आंसू रोता है ,होके दिल अब दुखी सा
जिसने है समझा .............................................
.
.
राज़
जिसने है समझा जरिया ख़ुशी का /
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कौड़ी कौड़ी माया जोड़ी, निशि-दिन जो भी कमाया
थोड़ी थोड़ी जो भी जोड़ी ,लुट गई जिसने गले लगाया
घर बना है मैदान जंग-ए-कशीं का
जिसने है समझा .............................................
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घर भूल संसार को भूला
बच्चे भूला परिवार को भूला
शौक की खातिर अपने उसने
मुंह से लगाया इसको जिसने
कर दिया खून घर की हँसी का
जिसने है समझा .............................................
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पल पल उसकी गलती काया
जेब से उसके जाती माया
खोके विवेक और होक अँधा
करता तैयार खुद ही फंदा
खुशियाँ रोतीं रोना अपनी बे-बसी का
जिसने है समझा .............................................
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बीवी रोती , सास रोती ,
बाप रोता ,मात रोती ,
जायदाद बिकी और बिक गई कोठी ,
मोहताज़ हुआ अब , न मिलती रोटी
खून के आंसू रोता है ,होके दिल अब दुखी सा
जिसने है समझा .............................................
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राज़
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